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भारत सरकार द्वारा कोयला क्षेत्र में किए गए सुधारों का असर दिखने लगा जिसके नतीजन विद्युत लागतें कम हुई

अप्रैल 28, 2017

शिमला  : 28   अप्रैल, 2017

 

            माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्र सरकार द्वारा कोयला क्षेत्र में शुरू किए गए सुधारों का असर दिखने लगा है आपूर्ति  श्रृंखला में कोयले की गुणवत्‍ता और दक्षता में सुधार की पहलों से कोयले की कीमतों, केन्‍द्रीय उपकर तथा रेलवे भाड़े में गत तीन वर्षों में संशोधन के बावजूद कोयला-संयंत्रों से बिजली की लागत में कमी आई है

       विद्युत लागत में कमी का मुख्‍य कारण विद्युत स्‍टेशनों द्वारा घरेलू ईंधन की निश्चित आपूर्ति के आधार पर बिजली की हर यूनिट के लिए कम कोयले का उपयोग करना है इसमें 23,349 करोड़ रूपए के आयात प्रतिस्‍थापन भी है , जो ईंधन की लागत को बचाता है क्‍योंकि विद्युत उत्‍पादकों द्वारा लगाए गए मूल्‍य प्रभारों में कोयले की लागत 54% से 60% है तथा इसे उपभोक्‍ताओं पर डाला जाता है , इसलिए कोयले की खपत के कारण उत्‍सर्जन के संदर्भ में टैरिफ और पर्यावरणीय लाभांश पर असर पड़ता है सरकारी आंकड़ों के अनुसार विद्युत स्‍टेशन अब विद्युत की प्रत्‍येक ईकाई के लिए तीन साल पहले उपयोग किए जाने वाले कोयले से 8% कम कोयला जला रहे हैं

            माननीय केन्‍द्रीय विद्युत मंत्री श्री पीयूष गोयल जो कोयला मंत्रालय के प्रभारी मंत्री भी है, के गतिशील  नेतृत्व के तहत एक महत्‍वपूर्ण परिवर्तन में भारत स्‍थायी विद्युत की कमी से विद्युत अधिशेष वाला बन गया है गत दो वर्षों में वर्तमान पारम्‍परिक विद्युत क्षमता के लगभग पांचवें हिस्‍से के बराबर रिकार्ड क्षमतागत वृद्धि तथा सौर विद्युत क्षमता में 157% की  वृद्धि से विद्युत उत्‍पादन में बढ़ोत्‍तरी हुई है ट्रांसमिशन लाईनों तथा सब-स्‍टेशनों में अब तक की उच्‍चतम बढ़ोत्‍तरी ने ट्रांसमिशन परिदृश्य में सुधार किया है जिसके परिणामस्‍वरूप वर्ष 2015 -16 में ऊर्जा हानि अब तक की सबसे कम 2.1% हुई  है
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